Khabarwala 24 News Hapur: Cremation Ground अब ग्रामीण अंचलों में ही शव को गंगाजल से स्नान कराया जा सकेगा। इसके लिए अंतिम संस्कार को शव गंगातट पर ले जाने की जरूरत नहीं होगी। शासन ने प्रदेश के 60 जिलों में छह-छह गांवों के श्मशानस्थलों (Cremation Ground )का कायाकल्प कराने की तैयारी की है। इसके लिए बजट जारी कर दिया गया है।
श्मशान स्थलों (Cremation Ground )पर मिनी ओवर हेड टैंक बनाकर गंगाजल का भंडारण कराया जाएगा। गंगाजल से निकलने वाले फव्वारे से शव को अंतिम स्नान कराया जाएगा। इसके लिए स्नान प्लेटफार्म तैयार किए जा रहे हैं। यह कार्य मार्च 2024 तक पूरा करना होगा। इससे ग्रामीण गंगाजल से स्नान कराकर गांवों के श्मशानस्थल पर ही अंतिम संस्कार कर सकेंगे।
गांवों के श्मशान स्थल पर होगी बेहतर व्यवस्था (Cremation Ground )
लोगों की इच्छा होती है कि अपने परिजन को अंतिम संस्कार से पहले गंगाजल से स्नान कराया जाए। संपन्न लोग अपने परिजन के शव लेकर ब्रजघाट गंगातट पर जाते हैं। वहीं श्मशानघाट पर अंतिम संस्कार करते हैं। जबकि बड़ी संख्या में एेसे भी लोग हैं जो अपने गांवों के श्मशान स्थल पर ही अंतिम संस्कार कर देते हैं। ऐसे में शव को गंगाजल से स्नान कराना संभव नहीं होता है। अब शासन ने गांवों के श्मशान स्थलों (Cremation Ground )पर ही शवों को गंगाजल से स्नान कराने की व्यवस्था की तैयारी की है। इनमें अन्य सुविधाओं के साथ ही शवों को गंगा जल से स्नान कराने की व्यवस्था भी होगी।
क्या है कायाकल्प की तैयारी (Cremation Ground )
ज्यादातर गांवों में श्मशानस्थल Cremation Ground बदहाल पड़े हैं। घास और गंदगी के चलते अव्यवस्था रहती है। श्मशानस्थलों की चारदीवारी भी नहीं हैं।इसके साथ ही अवशेष एकत्र करके रखने, अंतिम संस्कार में आने वालों के बैठने और शवों को स्नान कराने व मुखाग्नि देने की यथोचित व्यवस्था नहीं हैं।ऐसे में ज्यादातर लोग शवों को अंतिम संस्कार के लिए अपने आसपास की नदियों व प्रमुख तालाबों के किनारों पर ले जाते हैं। इससे नदियों अौर तालाबों में जल प्रदूषण की समस्या बढ़ जाती है। शवों को दूर-दराज में स्थित नदियों तक ले जाने के लिए कई वाहनों काे ले जाते हैं, उनसे भी प्रदूषण फैलता है।
अंतिम संस्कार की अपने यहीं क्या है तैयारी (Cremation Ground)
शासन की योजना शवों का अंतिम संस्कार अपने गांवों के आसपास ही कराने की है। इससे एक ओर जहां लोगों को नदियों तक भाग-दौड़ करने की जरूरत नहीं होगी, वहीं संसाधनों का दुरुपयोग होने से बच सकेगा। ज्यादातर गांवों में श्मशानस्थल की भूमि हैं। इनमें से कई गांवों में श्मशानस्थल हैं तो कई में बनाए जाने हैं। जहां पर श्मशानस्थल हैं, वह भी मानकों के अनुसार नहीं हैं। ऐसे में अंतिम संस्कार में जाने वालों को कई प्रकार की परेशानी का सामना करना पड़ता है।
सुविधायुक्त बनेंगे श्मशानस्थल (Cremation Ground )
अब शासन ने श्मशानस्थलों पर जरूरी सुविधा देने की तैयारियां की हैं। इसके लिए प्रत्येक श्मशानस्थल के लिए 26 लाख रुपये का बजट आवंटित किया गया है। सबसे जरूरी सुविधा शवों काे गंगाजल से स्नान कराने की है। इसके लिए एक टंकी लगाने के साथ ही स्नान प्लेटफार्म बनाया जाएगा। वहां पर फव्वारे से शवों को गंगाजल से स्नान कराया जाएगा। इसके साथ ही ग्राम प्रधान व ग्राम सचिव के लिए कार्यालय बनेगा।
अंतिम संस्कार के लिए प्लेटफार्म बनाने के साथ ही लोगों के बैठने को शेड भी लगाया जाएगा।जिले में मुरादपुर पावटी, भगवंतपुर आलमपुर, धनौरा, रामपुर, खड़खड़ी और हिंडालपुर के श्मशानस्थलों का कायाकल्प होगा। वहीं पिछले साल चयनित कल्याणपुर, सिवाया और हरसिंगपुर का अधूरा कार्य भी अब पूरा किया जा सकेगा। प्रत्येक जिले में छह-छह श्मशानस्थलों का कायाकल्प मार्च तक पूरा किया जाना है।
क्या कहते हैं अधिकारी
श्मशानस्थलों का कायाकल्प किया जा रहा है। इसके साथ ही शवों को गंगास्नान कराने की भी व्यवस्था की जा रही है। मार्च 2024 तक यह कार्य पूरा कर लिया जाएगा। बजट प्राप्त हो गया है। वीरेंद्र सिंह, जिला पंचायतराज अधिकारी।