Khabarwala 24 News New Delhi : Sleep Expert Talking अक्सर लोग कभी देर रात तक मोबाइल स्क्रॉल करने तो कभी ओटीटी का आकर्षण तो कभी ऑफिस की कोई टेंशन, इन तमाम कारणों से लोग अच्छी तरह से नींद नहीं ले पाते. लेकिन अगर यह आदत बन गई तो यह कई बीमारियों को न्योता दे सकता है। कई बार स्लीप एप्निया के कारण भी लोगों की नींद पूरी नहीं हो पाती अब सवाल यह उठता है कि आखिर हमें कितनी नींद लेनी चाहिए? आइए इन सब सवालों के जवाब जानते हैं…
कम सोने से दिनभर सुस्ती, मूड खराब और झुंझलाहट (Sleep Expert Talking)
वहीं कुछ लोग ज्यादा से ज्यादा वक्त सोकर बिताने का हुनर रखते हैं लेकिन डॉक्टर्स कहते हैं कि कम या ज्यादा सोना, दोनों ही सेहत के लिए ठीक नहीं है। एक दिन ठीक से नहीं सोने के कारण ही दिनभर सुस्ती, मूड खराब और झुंझलाहट-सी होती है लेकिन अगर यह आदत बन गई तो यह कई बीमारियों को न्योता दे सकता है। कई बार स्लीप एप्निया के कारण भी लोगों की नींद पूरी नहीं हो पाती।
कमोबेश सभी आयु वर्ग या किसी जेंडर को हो सकती है (Sleep Expert Talking)
नींद एक ऐसी जरूरत है जिसके बगैर इंसान अधूरा है। अक्सर नींद पूरी न हो पाने के कारण लोग पूरे दिन अपने काम सही से नहीं कर पाते। ResMed में एशिया और लेटिन अमेरिका के मेडिकल अफेयर्स हेड डॉ सिबाशीष डे का कहना है कि स्लीप एपनिया एक गंभीर और लाइफ थ्रेटनिंग स्थिति है। कमोबेश स्लीप एपनिया सभी आयु वर्गों या किसी भी जेंडर को हो सकती है, लेकिन ये पुरुषों में अधिक आम है।
आइए जानते हैं कि कम सोने के क्या-क्या नुकसान हैं (Sleep Expert Talking)
मेमोरी लॉस : कम नींद लेने से याददाश्त कमजोर होती है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की रिसर्च कहती है कि नींद के दौरान हमारा दिमाग दिनभर की मेमोरी स्टोर करता है। अगर सही से सोएंगे नहीं, तो ब्रेन स्लो हो जाएगा।
वजन बढ़ना : अगर वजन कंट्रोल करना चाहते हो, तो सही से सोना शुरू करो। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) की एक स्टडी के अनुसार जो लोग 6 घंटे से कम सोते हैं, उनके मोटे होने की संभावना 30% ज्यादा होती है।
दिल की बीमारी और डायबिटीज : CDC (सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल) की स्टडी बताती है कि कम नींद से ब्लड शुगर लेवल बिगड़ सकता है, जिससे डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ जाता है।
मूड स्विंग और डिप्रेशन : अगर छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आता है या स्ट्रेस ज्यादा रहता है, तो इसकी वजह कम नींद हो सकती है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक्सपर्ट्स बताते हैं कि जो लोग 6 घंटे से कम सोते हैं, उनमें डिप्रेशन और एंग्जायटी का खतरा दोगुना होता है।
ज्यादा सोने वाले लोगों में स्ट्रोक व हार्टअटैक का खतरा (Sleep Expert Talking)
यह कोई “वन साइज फिट्स ऑल” वाली चीज नहीं है। अक्सर उम्र के हिसाब से नींद की जरूरत अलग होती है। नेशनल स्लीप फाउंडेशन और हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के एक्सपर्ट्स बताते हैं कि हर एज ग्रुप के लिए कितनी नींद जरूरी है। कम सोने के नुकसान तो ज्यादातर लोग समझते ही हैं, लेकिन अधिक सोने के कई नुकसान होते हैं। ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में छपी रिसर्च के मुताबिक, 9 घंटे से ज्यादा सोने वाले लोगों में स्ट्रोक और हार्टअटैक का खतरा 20% तक बढ़ सकता है।
साइड इफेक्ट, वजन बढ़ता है, दिनभर आलस रहता है (Sleep Expert Talking)
ज्यादा सोने से मेटाबॉलिज्म स्लो हो जाता है, जिससे वजन बढ़ सकता है। दिनभर आलस बना रहता है, और काम करने की एनर्जी नहीं रहती। सोने से पहले थोड़ा और सो लेते हैं, वाली आदत हमारी बॉडी क्लॉक को डिस्टर्ब कर देती है। डॉ सिबाशीष डे का कहना है कि अगर रात में सोने में दिक्कत होती है। बार-बार नींद टूटती है या सुबह उठने के बाद भी थकान लगती है तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह स्लीप डिसऑर्डर हो सकता है। ऐसे में तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
अच्छी नींद के लिए कसरत व ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें (Sleep Expert Talking)
सोने और उठने का एक टाइम फिक्स करें चाहे वीकेंड हो या छुट्टी, एक ही टाइम पर सोएं और जागें। मोबाइल से दूर रहें। सोने से पहले मोबाइल और टीवी से बचें। ब्लू लाइट ब्रेन एक्टिव कर देती है। डिनर हल्का करें और सोने से पहले चाय-कॉफी से बचें। बेड सिर्फ सोने के लिए रखे। बेड पर बैठ काम न करें। इससे दिमाग बेड को आराम करने की जगह काम से जोड़ने लगता है। एक्सरसाइज और मेडिटेशन के अलावा हल्की फुल्की कसरत और ब्रीदिंग एक्सरसाइज से नींद अच्छी आती है।
Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।